कल्कि

कल्कि
चतुर्यग समाप्त होने के साथ ये प्रभु विष्णु का दसवाँ व अंतिम मुख्य अवतार होगा।
राजा रवि वर्मा का बनाया चित्र!

चक्र रुप में चलने वाले काल के अंतिम युग के समाप्त होने की परिस्थिती में कल्कि का अवतरण होगा।
जब भगवान कल्कि देवदत्त नाम के घोड़े पर आरुढ़ होकर तलवार से दुष्टों का संहार करेंगे पुन: सतयुग की स्थापना होगी।

भगवान का यह अवतार ” निष्कलंक भगवान ” के नाम से भी जाना जायेगा और भगवान श्री कल्कि ६४ कलाओं के पूर्ण निष्कलंक अवतार होंगे।
श्रीमदभागवत व भविष्यपुराण में भी इसका वर्णन मिलता है।इस विषय में अधिक वर्णन कल्कि पुराण में मिलता है जो 18 मुख्य पुराणोंं का भाग नहीं है।

श्रीमद्भागवत-महापुराण के 12वे स्कंद के अनुसार-
सम्भलग्राममुख्यस्य ब्राह्मणस्य महात्मनः।
भवने विष्णुयशसः कल्किः प्रादुर्भविष्यति।।
अर्थ- शम्भल ग्राम में विष्णुयश नाम के एक ब्राह्मण होंगे। उनका ह्रदय बड़ा उदार और भगवतभक्ति पूर्ण होगा। उन्हीं के घर कल्कि भगवान अवतार ग्रहण करेंगे।

कल्कि पुराण के अनुसार परशुराम कल्कि के गुरु होंगे और उन्हें युद्ध की शिक्षा देंगे। वे ही कल्कि को भगवान शिव की तपस्या करके उनके दिव्यास्त्र को प्राप्त करने के लिये कहेंगे।

कल्कि पुराण में ”कल्कि“ अवतार के जन्म व परिवार की कथा इस प्रकार कल्पित है-

“शम्भल नामक ग्राम में विष्णुयश नाम के एक ब्राह्मण निवास करेंगे, जो सुमति नामक स्त्री के साथ विवाह करेंगें दोनों ही धर्म-कर्म में दिन बिताएँगे। कल्कि उनके घर में पुत्र होकर जन्म लेंगे और अल्पायु में ही वेदादि शास्त्रों का पाठ करके महापण्डित हो जाएँगे।

बाद में वे जीवों के दुःख से कातर हो महादेव की उपासना करके अस्त्रविद्या प्राप्त करेंगे जिनका विवाह बृहद्रथ की पुत्री पद्मादेवी के साथ होगा।”

फिलहाल, अभी इसमें समय है!😅

मत्स्यः कूर्मो वराहश्च नारसिंहोऽथ वामनः।
रामो रामश्च रामश्च कृष्णः कल्किश्च ते दशः।।

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